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   विश्वकर्मा प्रकाश के अनुशार वास्तु में में 4 दिशा , 4 विदिश और 8 मध्य दिशा कुल मिलाके 16 दिशा क्षेत्र बताए गए है |   

   जबभी हम जमीन-प्लाट खरीदते है और उसपर हम चार दिवार बनाकर उस क्षेत्र में मकान यादि बनाते है | अंतरिक्ष उस टुकडे के रूप में अपना व्यवहारशुरू करता है है |

   अलग अलग दिशामे अलग अलग शक्तिया होती है | वो शक्तिया अपना अलग अलग प्रभाव अदा करती है | इस तरह 16 वास्तु क्षेत्रमे अलफ अलग प्रभाव देखनेको मिलता है |

   इस लिए पूर्व में मैं डोर रखनेसे हमें ज्ञान मिले प्रकाश मिले तथा शुद्ध विचार हो | हमारा सामाजिक संपर्क बढे |

   इसदिशा का स्वामी ग्रह सूर्य है | देवताओं का रजा ईंद्र ईस दिशा का अधिपति है | सूर्य पुरे ब्रहमांड का तथा पूरी दिशाओ का संचालक ग्रह माना गया है |